पूजा को बचपन से ही अकेले रहने का शौक था। स्कूल में कोई उसका बेस्ट फ्रेंड भी नहीं था। क्योंकि पूजा को अकेले में रहना ज्यादा पसंद था।
पूजा अपने मम्मी पापा के साथ भी इतना समय नहीं बिताती थी, और एकांत में बैठकर कुछ ना कुछ सोचती रहती थी।
एक दिन
पूजा अपने घर की छत पर बैठकर यह सोचती है कि मैं कब बड़ी होऊँगी, और कब मैं अपनी मर्जी से बाहर जाऊंगी। जब पूजा अपने से बड़ी लड़कियों को बाहर देखती तो पूजा का भी मन करता कि वह भी बाहर घूमे फिरे।
पूजा को
जल्दी बड़े होने की इच्छा थी लेकिन कोई अचानक से इतनी जल्दी बड़ा कैसे हो सकता है यह तो पूजा का बचपन था।
अभी उसे जिम्मेदारियां का एहसास नहीं था उसे यह लगता था कि बड़े होने के बाद जिंदगी बहुत अच्छी और आसान हो जाती है। हर किसी की जिंदगी अच्छी हो ऐसा तो नहीं हो सकता है।
बढ़ती उम्र के शौक
जैसे-जैसे पूजा बड़ी हो रही थी उसकी इच्छाए भी बढ़ती जा रही थी। अब पूजा का बचपन बीत चुका था और अब पूजा 20 साल की हो गई थी।
पूजा को ट्रैकिंग का शौक था। अब वह अपने शौक पूरे कर सकती थी। बचपन में भी जब पूजा अकेली बैठी रहती थी, तो पहाड़ों में जाने के ट्रैकिंग करने के सपने देखती।
बचपन में तो
पूजा का कोई दोस्त नहीं था। लेकिन कॉलेज में तो पूजा की एक बेस्ट फ्रेंड थी, जिससे पूजा पूरी बातें शेयर करती थी।
दोनों को ही ट्रैकिंग का शौक था। एक दिन उनके कॉलेज से उन्हें 10 दिन के लिए घूमने ले जाते हैं। उन्हें कॉलेज में बताया जाता है कि उन्हें वहां जंगलों में ट्रैकिंग करने का भी मौका मिलेगा, लेकिन वहां जाकर ऐसा कुछ नहीं होता है।
10 दिन तक
अलग-अलग जगह पर घूम कर वह वापस आ जाते हैं, लेकिन पूजा और उसकी फ्रेंड को इतना मजा नहीं आता है। क्योंकि उन दोनों को एडवेंचर वाली जगह पर जाना ज्यादा पसंद है।
एडवेंचर की जगह
कॉलेज से घूमने क बाद वह दोनों फ्रेंड्स अपने शहर से दूर किसी पहाड़ पर ट्रेकिंग के लिए चली जाती है। वहां जाकर वह जंगल में एडवेंचर करती है। और टेंट हाउस बनाकर रात को वही जंगल में रहती है।
उनके अलावा वहां
दो-तीन लड़कों का एक दोस्तों का ग्रुप भी था जो की ट्रेकिंग के लिए आए थे। रात में पूजा और उसकी दोस्त से उन लड़कों की बातचीत हुई। पूजा को वह लड़की ठीक लगते हैं क्योंकि उनकी कोई ऐसी वैसी हरकतें नहीं थी।
सुबह होते ही वह ट्रैकिंग के लिए साथ निकल जाते हैं। उनमे से एक लड़के को पूजा पसंद आ गई थी। मैं लड़का पूजा से बहुत अच्छे से बात कर रहा था पूजा का मन बिल्कुल साफ था, तो उस लड़के की गोल-गोल बातें पूजा को समझ नहीं आ रही थी।
वह लड़का पूजा
से अपनी फीलिंग शेयर करना चाहता था। पूजा को तो उसकी बात समझ नहीं आ रही थी, लेकिन पूजा की दोस्त सब समझ रही थी। और फिर थोड़ी देर बाद पूजा की दोस्त पूजा को बताती है कि वह लड़का तुमसे कुछ कहना चाहता है।
थोड़ी देर बाद वह लड़का पूजा से अपने मन की बात कह देता है और पूजा उससे कुछ समय मांगती है और कहती है कि इसका जवाब है कुछ समय बाद देगी।
अब पूजा का
ध्यान ट्रैकिंग पर न होकर उस लड़के की बातों पर था। पूजा उसे लड़की की बातें सोच कर अकेले-अकेले ही मुस्कुरा रही थी।
पूजा की फ्रेंड पूजा की मुस्कुराहट के पीछे का राज समझ रही थी, और पूजा को चिड़ा रही थी। उसे समय बाद पूजा भी अपने मन की बात उसे लड़के को बता देती है। दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं।
एडवेंचर के
दौरान पूजा और उस लड़के को प्यार हो जाता है। ट्रैकिंग के दिन पूरे होते ही वे अपने अपने घर चले जाते है।
उनका मिलना तो अब लगा ही रहता है। दोनो की तरफ से बात शादी तक पहुंच जाती है। दोनों अब अपने घर मे बात कर लेते है। दोनों के परिवार वालों को ही उनकी शादी से कोई आत्पत्ति नहीं होती है।
दोनों के घर वाले उनकी शादी खुशी खुशी करवा देते हैं। अब दोनों अपनी शादी शुदा जिंदगी में खुशी-खुशी रहने लगते हैं।
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