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प्यार का इंतज़ार

कभी-कभी मां-बाप भी बहुत लापरवाह हो जाते हैं । और अपनी बेटी का हाथ ऐसे इंसान के हाथ में सौप देते हैं, जो उसे खिलौना समझता है।

यह बात है कविता की जिसके पिता ने अमिर लड़का ढूंढने के चक्कर में अपनी बेटी को, एक ऐसे शख्स के हवाले कर दिया जो पूरी जिंदगी उसे खिलौना समझता है।
कविता बहुत ही सीधी साधारण लड़की है जिसे कोई भी कुछ भी बोल देता है और वह सुन लेती है कभी किसी का कहना नहीं टलती है।

पिता की लापरवाही

कविता के पिता ने कविता के लिए अमीर लड़का इसलिए ढूंढा था, ताकि आगे जाकर कविता को कोई दिक्कत ना आए। लेकिन शादी के बाद कविता उस लड़की के साथ बिल्कुल खुश नहीं थी। क्योंकि वह लड़का उससे ऐसे बर्ताव करता था जैसे कि वह कोई खिलौना हो।

कविता बहुत भोली थी वह अपने पति का गलत व्यवहार भी सहन कर लेती थी। उसका पति यह बिल्कुल नहीं समझता था कि उसे भी बुरा लगता है, लेकिन वह कविता के साथ बहुत बुरी तरह से बर्ताव करता रहा।

कविता किसी को बताती भी नहीं थी कि उसका पति उसके साथ गलत व्यवहार करता है। बल्कि उसने अपनी मां को भी नहीं बताया था, क्योंकि उसने यह सोच रखा था की लड़की को शादी के बाद बहुत सी चीजे सहन करनी होती है। और वह अपने पति का गलत व्यवहार सहन कर रही थी।

लड़का अमीर तो था लेकिन उसमें तोर तरीके बिल्कुल सही नहीं थे। उसे यह भी नहीं पता था कि अपनी पत्नी के साथ व्यवहार कैसे किया जाए । और वह कविता के साथ इतनी बुरी तरह से व्यवहार करता जब मन करता कविता को वह डराता धमकाता था।

कविता के पति की सोच बहुत छोटी थी। वह इतने बड़े घर का लड़का था लेकिन उसकी सोच एक गांव के लड़के की तरह थी हालांकि गांव के लड़के भी बहुत अच्छे और समझदार होते हैं।

कविता को जब भी बाहर जाना होता था वह डर-डर के अपने पति से पूछती, लेकिन उसका पति उसे मना कर देता। कविता का शादी के बाद घर से बाहर जाना भी बंद हो गया था।
कविता किसी से कुछ कह भी नहीं सकती थी क्योंकि उसे अपने पति से डर लगता था।

गलत इरादे

कविता के पति के इरादे ठीक नहीं थे। वह कविता में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाता था। शादी के 3 साल बाद तो कविता के एक बेटी हुई थी। अब कविता को एक आसरा तो था कि उसकी मन अपनी बेटी के साथ लगा रहता था।

अपने पति के भरोसे तो कविता अकेली ही पड़ गई थी। पति के होते हुए भी उसे पूरा दिन अकेले काटना पड़ता था।
अब उनकी बेटी 5 साल की हो चुकी थी। जब भी कविता का पति कविता के साथ गलत व्यवहार करता था, उसकी बेटी डरी सी सहमी हो जाती थी। अपने पिता का गलत व्यवहार उसकी बेटी भी देख रही थी, और बेटी पर बहुत गलत असर पड़ रहा था।

कविता को अपनी बेटी की चिंता थी कि जब यह बड़ी होगी तो इसे भी अपने पिता जैसा पति ही न मिले। कविता ने तो यह ठान लिया था कि वह अपनी बेटी की शादी किसी अमीर लड़के को देखकर तो नहीं करेगी।

कविता के पति के इरादे कुछ ऐसे थे कि उसे दूसरी औरतों में ज्यादा दिलचस्पी थी। वह हर रोज अपना दिन किसी और औरत के साथ गुजरा था लेकिन यह बात कविता को अब तक पता नहीं थी। लेकिन सच को कब तक छुपा सकते हैं।

जब कविता को अपने पति की हरकतें पता चलती है तो वह टूट जाती है। उसे अपने पिता पर बहुत गुस्सा आता है कि उन्होंने ऐसे ही किसी भी लड़के के साथ उसकी शादी कर दी, यह भी नहीं देखा कि वह लड़का उसके लिए ठीक है या नहीं। लेकिन अब कविता क्या ही कर सकती थी।

कविता अपनी बेटी को लेकर कहीं और जगह रहने का सोच लेती है। क्योंकि अब वह अपने पति के साथ नहीं रह सकती और इतना सच जानने के बाद तो कोई भी लड़की ऐसे इंसान के साथ रहना बिलकुल पसंद नहीं करेगी।

कविता अपने पति को तलाक देकर कहीं और रहने चली जाती है। कविता का पिता उसे अपने घर बुलाता है, लेकिन कविता अलग ही रहना चाहती है। और अपनी बेटी को अकेले ही अच्छी परवरिश देकर उसे एक अच्छा इंसान बनाती है।


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