यह दास्तां है ऐसे प्रेमियोमियो की जो अपने प्यार के लिए कोई भी हद पार कर सकते है। जिनको दुनिया का समाज का किसी का कोई डर नही है।
कार्तिक और नव्या एक दूसरे से इतना प्यार करते थे कि एक दूसरे के लिए अपने परिवार के भी खिलाफ जाने को तैयार थे।
उन्हें समाज से रिश्तेदारों से किसी से कोई मतलब नहीं था, उन दोनों को सिर्फ अपनी खुशी का ध्यान था।
दोनों के लिए सबसे बड़ी बात यह थी कि दोनों की जाती भी अलग थी। और हमारा समाज अंतरजातीय विवाह के खिलाफ है। हिंदू समाज में ऐसे बहुत कम लोग है जो अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देते हैं। गांव में तो अंतरजातीय विवाह बिल्कुल भी नहीं चलता है।
कार्तिक का प्यार
कार्तिक नव्या से इतना प्यार करता था कि वह उससे भागकर शादी करने के लिए भी तैयार था। लेकिन नव्या चाहती थी कि उन दोनों की शादी उनके परिवार की मर्जी से हो यह बहुत कठिन था लेकिन नव्या को भाग कर शादी नहीं करनी थी।
कार्तिक नव्या से अक्सर यह सवाल करता था कि अगर हमारे घर वाले नहीं माने तो क्या तुम मुझसे शादी नहीं करोगी। नव्या का यही जवाब होता था कि हम पहले हमारे परिवार को मनाने की पूरी कोशिश करेंगे और बार-बार कोशिश करेंगे।
क्या पता हमारे परिवार वालों को भी हमारा प्यार समझ में आए, और उन्हें भी एहसास हो कि हम दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते हैं।
लेकिन परिवार को मनाना इतना आसान नहीं था। लेकिन फिर भी दोनों ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश करी। उनकी कोशिश नाकामयाब रहती हैं। दोनों एक दूसरे से मिलकर बात करते हैं, और सोचते कि अब हम ऐसा क्या करें जिससे हमारा परिवार भी मान जाए।
जब दोनों की इतनी कोशिश करने के बाद भी उनके परिवार नहीं मानते हैं, तो दोनों एक मंदिर में जाकर शादी कर लेते हैं। जब नव्या के घर वालो को पता चलता है, तो उन्हें बहुत गुस्सा आता है । नव्या के पिता कहते है की हमारी बेटी ने हमारी नाक कटवा दी।
कार्तिक और नव्या के लिए भी भागकर शादी करना इतना आसान नहीं था। उन दोनों को भी बुरा लग रहा था कि उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ जाकर शादी करी है और अब उनका परिवार उन्हे स्वीकार भी नहीं कर रहा है।
घरवालो का गुस्सा
नव्या और कार्तिक के घर वाले उन्हें हर जगह ढूंढते हैं। उन्होंने अपने शहर से बाहर जाकर शादी करी थी क्योंकि उन्हें पता था, कि अगर वह इस शहर में शादी करेंगे तो उन्हें घर वाले कहीं ना कहीं पकड़ लेंगे।
नव्या बहुत रोती है क्योंकि उसे अपने माता-पिता की याद आ रही है। उसे देखकर कार्तिक को भी बहुत बुरा लगता है। और वह नव्या से पूछता है, कि क्या हम एक बार अपने घर वालों के सामने तो जाए क्या पता वह हमें स्वीकार ही कर ले।
लेकिन नव्या उसे मना करती है, क्योंकि नव्या कहती है कि अभी घर वालों को बहुत गुस्सा आ रहा होगा। इस समय हम उनके सामने जाएंगे तो क्या पता वह हमें कुछ कर दे , क्योंकि गुस्से में इंसान पर खुद का काबू ही नहीं होता है। वह कुछ गलत कर बैठता है।
कार्तिक कहता है कि ऐसे हम कब तक रहेंगे। एक न एक दिन हमें घर वालों के पास तो जाना है ही होगा। तो नव्या कहती है कि हम सही समय आने पर ही हमारे घर वालों के सामने जाएंगे।
कार्तिक और नव्या का परिवार के सामने जाने का समय आ गया था। नव्या अपने घर जाती है तो उसे उसके पिता घर में घुसने नहीं देते हैं और बहुत बुरा भला सुनाते हैं। नव्या अपने पिता के सामने बहुत रोती है और माफी मांगती है।
नव्या अपने पिता को समझती है कि कार्तिक उससे बहुत प्यार करता है। और उसे बहुत खुश रखता है। हम जाति से ही किसी लड़के को गलत नहीं कह सकते हैं।
जब नव्या के पिता नव्या को रोते हुए देखते हैं तो उनका दिल भर आता है और वह कार्तिक और नव्या की शादी को मंजूर कर लेते हैं। क्योंकि एक बाप अपनी बेटी से ज्यादा दिन तक नाराज नहीं रह सकता है, क्योंकि एक बेटी ही अपने बाप से ज्यादा लगाव रखती है।
नव्या के पिता कार्तिक को भी घर बुलाते हैं, और उसका दामाद की तरह स्वागत करते हैं। और उसे दामाद के रूप में स्वीकार कर लेते हैं। अब कार्तिक और नव्या इतने खुश हो जाते हैं कि उन दोनों की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं होता है। अंत में सब ठीक हो ही जाता है।
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